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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 15
ज्यानिनादमथ गृह्णती तयोः प्रादुरास बहुलक्षपाछविः । ताडका चलकपालकुण्डला कालिकेव निबिडा बलाकिनी ॥
उनके धनुष की टंकार को सुनकर ताड़का प्रकट हुई, जो घने अंधकार के समान, हिलते हुए कपाल-कुण्डलों से युक्त, कालिका के समान भयंकर थी।
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