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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 13
स्थाणुदग्धवपुषस्तपोवनं प्राप्य दाशरथिरात्तकार्मुकः । विग्रहेण मदनस्य चारुणा सोऽभवत्प्रतिनिधिर्न कर्मणा ॥
तप से जले हुए शरीर वाले तपोवन में पहुँचकर धनुष धारण किए हुए दशरथपुत्र राम अपने रूप से कामदेव के समान प्रतीत हुए, यद्यपि कर्म से नहीं।
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