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रघुवंशम् • अध्याय 11 • श्लोक 12
नाम्भसां कमलशोभिनां तथा शाखिनां च न परिश्रमच्छिदाम् । दर्शनेन लघुना यथा तयोः प्रीतिमापुरुभयोस्तपस्विनः ॥
कमलों से शोभित जल और शीतल छाया देने वाले वृक्ष भी उनके दर्शन से उत्पन्न हुई तपस्वी के आनंद के समान उनके परिश्रम को दूर नहीं कर सके।
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