स चतुर्धा बभौ व्यस्तः प्रसवः पृथिवीपतेः । धर्मार्थकाममोक्षाणामवतार इवाङ्गवान्॥
राजा की वह संतति चार भागों में विभाजित होकर ऐसे प्रतीत हुई, मानो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के साकार अवतार हों।
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