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रघुवंशम् • अध्याय 10 • श्लोक 73
तस्योदये चतुर्मूर्तेः पौलस्त्यचकितेश्वराः । विरजस्कैर्नभस्वद्भिर्दिश उच्छ्वसिता इव॥
उस चतुर्मूर्ति के उदय पर रावण से भयभीत देवता ऐसे प्रतीत हुए, जैसे निर्मल वायु से दिशाएँ प्रसन्न होकर श्वास ले रही हों।
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