निर्दोषमभवत्सर्वमाविष्कृतगुणं जगत् । अन्वगादिव हि स्वर्गो गां गतं पुरुषोत्तमम्॥
सारे संसार में दोष समाप्त हो गए और गुण प्रकट हो उठे, मानो स्वर्ग स्वयं पृथ्वी पर आए हुए पुरुषोत्तम का अनुसरण कर रहा हो।
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