ते बहुज्ञस्य चित्तज्ञे पत्नौ पत्युर्महीक्षितः । चरोरर्धार्धभागाभ्यां तामयोजयतामुभे॥
वे दोनों पत्नियाँ, जो अपने पति के मन को जानने वाली थीं, उस चरु के आधे-आधे भाग देकर सुमित्रा को उसमें सम्मिलित कर लिया।
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