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रघुवंशम् • अध्याय 10 • श्लोक 44
सोऽहं दाशरथिर्भूत्वा रणभूमेर्बलिक्षमम् । करिष्यामि शरैस्तीक्ष्णैस्तच्छिरःकमलोच्चयम्॥
इसलिए मैं दशरथ का पुत्र बनकर रणभूमि में उस बलशाली राक्षस के कमल के समान सिरों को अपने तीक्ष्ण बाणों से नष्ट करूँगा।
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