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रघुवंशम् • अध्याय 1 • श्लोक 94
सत्यामपि तपःसिद्धौ नियमापेक्षया मुनिः । कल्पवित्कल्पयामास वन्यामेवास्य संविधाम् ॥
तप की सिद्धि होने पर भी, नियमों का पालन करने के लिए उस मुनि ने विधि जानकर उसके लिए वनवासी जीवन की व्यवस्था की।
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