ईप्सितं तदवज्ञानाद्विद्धि सार्गलमात्मनः । प्रतिबध्नाति हि श्रेयः पूज्यपूजाव्यतिक्रमः ॥
इसलिए अपनी इच्छा की पूर्ति में जो बाधा है, उसे अपने इस अवमान के कारण समझो, क्योंकि पूजनीय का अनादर कल्याण को रोक देता है।
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