स शापो न त्वया राजन्न च सारथिना श्रुतः । नदत्याकाशगङ्गायाः स्रोतस्युद्दामदिग्गजे ॥
हे राजन्, वह शाप न तुमने सुना और न ही सारथि ने, क्योंकि उस समय आकाशगंगा के प्रवाह में प्रचंड दिग्गजों का गर्जन हो रहा था।
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