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रघुवंशम् • अध्याय 1 • श्लोक 76
धर्मलोपभयाद्राज्ञीमृतुस्नातामनुस्मरन् । प्रदक्षिणक्रियार्हायां तस्यां त्वं साधु नाचरः ॥
राज्ञी के ऋतुस्नान का स्मरण करते हुए धर्मभंग के भय से, आप उस पूजनीय सुरभि की प्रदक्षिणा करने का उचित आचरण नहीं कर सके।
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