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रघुवंशम् • अध्याय 1 • श्लोक 73
इति विज्ञापितो राज्ञा ध्यानस्तिमितलोचनः । क्षणमात्रमृषिस्तस्थौ सुप्तमीन इव ह्रदः ॥
राजा द्वारा इस प्रकार निवेदन किए जाने पर, ध्यान में लीन मुनि कुछ क्षण ऐसे स्थिर रहे जैसे सरोवर में सोई हुई मछली।
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