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रघुवंशम् • अध्याय 1 • श्लोक 66
नूनं मत्तः परं वंश्याः पिण्डविच्छेददर्शिनः । न प्रकामभुजः श्राद्धे स्वधासंग्रहतत्पराः ॥
निश्चय ही मेरे बाद मेरे वंशज पिण्डदान की परंपरा टूटने का भय देखकर श्राद्ध में स्वधा ग्रहण करने में उत्सुक नहीं होंगे।
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