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रघुवंशम् • अध्याय 1 • श्लोक 65
किन्तु वध्वां तवैतस्यामदृष्टसदृशप्रजम् । न मामवति सद्वीपा रत्नसूरपि मेदिनी ॥
किन्तु आपकी इस पुत्रहीन बहू के कारण, रत्नों से परिपूर्ण और द्वीपों वाली यह पृथ्वी भी मेरी रक्षा नहीं कर पा रही है।
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