तमातिथ्यक्रियाशान्तरथक्षोभपरिश्रमम् । पप्रच्छ कुशलं राज्ये राज्याश्रममुनिं मुनिः ॥
अतिथि-सत्कार के बाद रथ के कष्ट से मुक्त हुए राजा से आश्रमवासी मुनि ने राज्य की कुशलता पूछी।
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