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रघुवंशम् • अध्याय 1 • श्लोक 46
काप्यभिख्या तयोरासीद्व्रजतोः शुद्धवेषयोः । हिमनिर्मुक्तयोर्योगे चित्राचन्द्रमसोरिव ॥
उन दोनों शुद्ध वेशधारी चलते हुए ऐसे शोभित हो रहे थे मानो हिम से मुक्त आकाश में सूर्य और चन्द्र का संयोग हो।
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