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रघुवंशम् • अध्याय 1 • श्लोक 43
सरसीष्वरविन्दानां वीचिविक्षोभशीतलम् । आमोदमुपजिघ्रन्तौ स्वनिःश्वासानुकारिणम् ॥
वे सरोवरों के कमलों की लहरों से उत्पन्न शीतल सुगंध को अपने श्वास के समान अनुभव करते हुए ग्रहण कर रहे थे।
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