मा भूदाश्रमपीडेति परिमेयपुरस्सरौ । अनुभावविशेषात्तु सेनापरिवृताविव ॥
आश्रम को कष्ट न हो इसलिए वे सीमित जनों के साथ आगे बढ़े, किन्तु अपने प्रभाव के कारण वे सेना से घिरे हुए प्रतीत होते थे।
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