शिष्ट व्यक्ति भले ही अप्रिय हो, परंतु पीड़ित के लिए औषधि के समान प्रिय था, और दुष्ट व्यक्ति चाहे प्रिय ही क्यों न हो, उसे सर्पदंशित उंगली की तरह त्याग दिया जाता था।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।