ज्ञान में मौन, शक्ति में क्षमा और त्याग में प्रशंसा का अभाव—उनके ये गुण एक-दूसरे से जुड़े हुए ऐसे प्रतीत होते थे मानो एक ही स्रोत से उत्पन्न हों।
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