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रघुवंशम् • अध्याय 1 • श्लोक 21
जुगोपात्मानमत्रस्तः भेजे धर्ममनातुरः । अगृध्नुराददे सोऽर्थमसक्तः सुखमन्वभूत् ॥
वे निर्भय होकर अपने को सुरक्षित रखते थे, बिना व्याकुलता के धर्म का पालन करते थे, लोभ रहित होकर अर्थ ग्रहण करते थे और आसक्ति रहित होकर सुख का अनुभव करते थे।
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