सेना परिच्छदस्तस्य द्वयमेवार्थसाधनम् । शास्त्रेष्वकुण्ठिता बुद्धिर्मौर्वी धनुषि चातता ॥
उनके लिए सेना और राजचिह्न ही साधन थे, उनकी बुद्धि शास्त्रों में अडिग थी और उनका धनुष सदा तना रहता था।
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