व्यूढोरस्को वृषस्कन्धः शालप्रांशुर्महाभुजः । आत्मकर्मक्षमं देहं क्षात्रो धर्म इवाश्रितः ॥
वे चौड़ी छाती वाले, बैल के समान कंधों वाले, साल वृक्ष के समान ऊँचे और विशाल भुजाओं वाले थे, उनका शरीर अपने कर्तव्यों को निभाने में समर्थ था, मानो क्षत्रिय धर्म ने ही उसमें आश्रय लिया हो।
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