मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 40
भीष्म उवाच- पुत्रस्यैतद् वचः श्रुत्वा यथाकार्षीत् पिता नृप। तथा त्वमपि वर्तस्व सत्यधर्मपरायणः ॥ ॥ इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि पुत्रगीता सम्पूर्णा ॥
भीष्मजी कहते हैं - नरेश्वर! पुत्र का यह वचन सुनकर पिता ने जैसे सत्य-धर्म का अनुष्ठान किया था, उसी प्रकार तुम भी सत्य-धर्म में तत्पर रहकर यथायोग्य बर्ताव करो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पुत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

पुत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें