मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 4
सोऽब्रवीत् पितरं पुत्रः स्वाध्यायकरणे रतम् । मोक्षधर्मार्थकुशलो लोकतत्त्वविचक्षणः ॥
वह मोक्ष, धर्म और अर्थ में कुशल तथा लोकतत्त्व का अच्छा ज्ञाता था। एक दिन उस पुत्र ने अपने स्वाध्यायपरायण पिता से कहा-
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पुत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

पुत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें