किं ते धनैर्बान्धवैर्वापि किं ते किं ते दारैर्ब्रह्मण यो मरिष्यसि ।
आत्मानमन्विच्छ गुहां प्रविष्टं पितामहास्ते क्व गताः पिता च ॥
ब्राह्मणदेव पिताजी! जब आप एक दिन मर ही जायँगे तो आपको इस धन से क्या लेना है अथवा भाई-बन्धुओं से आपका क्या काम है तथा स्त्री आदि से आपका कौन-सा प्रयोजन सिद्ध होने वाला है? आप अपने हृदयरूपी गुफा में स्थित हुए परमात्मा को खोजिये। सोचिये तो सही, आपके पिता और पितामह कहाँ चले गये?
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