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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 31
अमृतं चैव मृत्युश्च द्वयं देहे प्रतिष्ठितम् । मृत्युमापद्यते मोहात् सत्येनापद्यतेऽमृतम् ॥
अमृत और मृत्यु दोनों इस शरीर में ही स्थित हैं। मनुष्य मोह से मृत्यु को और सत्य से अमृत को प्राप्त होता है।
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