तस्मात् सत्यव्रताचारः सत्ययोगपरायणः ।
सत्यागमः सदा दान्तः सत्येनैवान्तकं जयेत् ॥
अतः मनुष्य को सत्यव्रत का आचरण करना चाहिये। सत्ययोग में तत्पर रहना और शास्त्र की बातों को सत्य मानकर श्रद्धापूर्वक सदा मन और इन्द्रियों का संयम करना चाहिये। इस प्रकार सत्य के द्वारा ही मनुष्य मृत्यु पर विजय पा सकता है।
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