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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 26
मृत्योर्वा मुखमेतद् वै या ग्रामे वसतो रतिः । देवानामेष वै गोष्ठो यदरण्यमिति श्रुतिः ॥
ग्राम या नगर में रहकर जो स्त्री-पुत्र आदि में आसक्ति बढ़ायी जाती है, यह मृत्यु का मुख ही है और जो वन का आश्रय लेता है, यह इन्द्रियरूपी गौओं को बाँधने के लिये गोशाला के समान है, यह श्रुति का कथन है।
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