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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 25
जातमेवान्तकोऽन्ताय जरा चान्वेति देहिनम् । अनुषक्ता द्वयेनैते भावाः स्थावरजङ्गमाः ।।
देहधारी जीव के जन्म लेते ही अन्त करने के लिये मौत और बुढ़ापा उसके पीछे लग जाते हैं। ये समस्त चराचर प्राणी इन दोनों से बँधे हुए हैं।
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