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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 24
मृत्युर्जरा च व्याधिश्च दुःखं चानेककारणम् । अनुषक्तं यदा देहे किं स्वस्थ इव तिष्ठसि ॥
पिताजी! जब इस शरीर में मृत्यु, जरा, व्याधि और अनेक कारणों से होने वाले दुःखों का आक्रमण होता ही रहता है, तब आप स्वस्थ-से होकर क्यों बैठे हैं?
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