मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 22
कृतानां फलमप्राप्तं कर्मणां कर्मसंज्ञितम् । क्षेत्रापणगृहासक्तं मृत्युरादाय गच्छति ॥
मनुष्य अपने खेत, दूकान और घर में ही फँसा रहता है, उसके किये हुए उन कर्मों का फल मिलने भी नहीं पाता, उसके पहले ही उस कर्मासक्त मनुष्य को मृत्यु उठा ले जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पुत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

पुत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें