मनुष्य अपने खेत, दूकान और घर में ही फँसा रहता है, उसके किये हुए उन कर्मों का फल मिलने भी नहीं पाता, उसके पहले ही उस कर्मासक्त मनुष्य को मृत्यु उठा ले जाती है।
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