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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 2
भीष्म उवाच- अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । पितुः पुत्रेण संवादं तं निबोध युधिष्ठिर ॥
भीष्मजी ने कहा - युधिष्ठिर! इस विषय में ज्ञानी पुरुष पिता और पुत्र के संवादरूप इस प्राचीन इतिहास का उदाहरण दिया करते हैं। तुम उस संवाद को ध्यान देकर सुनो।
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