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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 19
तं पुत्रपशुसम्पन्नं व्यासक्तमनसं नरम्। सुप्तं व्याघ्घ्रो मृगमिव मृत्युरादाय गच्छति ॥
जैसे सोये हुए मृग को बाघ उठा ले जाता है, उसी प्रकार पुत्र और पशुओं से सम्पन्न एवं उन्हीं में मन को फँसाये रखने वाले मनुष्य को एक दिन मृत्यु आकर उठा ले जाती है।
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