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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 18
मोहेन हि समाविष्टः पुत्रदारार्थमुद्यतः । कृत्वा कार्यमकार्यं वा पुष्टिमेषां प्रयच्छति ॥
जो मनुष्य मोह में डूबा हुआ है, वही पुत्र और स्त्री के लिये उद्योग करने लगता है और करने तथा न करने योग्य काम करके इन सबका पालन-पोषण करता है।
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