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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 15
श्वः कार्यमद्य कुर्वीत पूर्वाह्न चापराह्निकम्। न हि प्रतीक्षते मृत्युः कृतमस्य न वा कृतम् ॥
कल किया जाने वाला काम आज ही पूरा कर लेना चाहिये। जिसे सायंकाल में करना है, उसे प्रातःकाल में ही कर लेना चाहिये; क्योंकि मौत यह नहीं देखती कि इसका काम अभी पूरा हुआ या नहीं।
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