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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 13
शष्याणीव विचिन्वन्तमन्यत्रगतमानसम् । वृकीवोरणमासाद्य मृत्युरादाय गच्छति ॥
जैसे घास चरते हुए भेड़े के पास अचानक व्याघ्री पहुँच जाती है और उसे दबोचकर चल देती है, उसी प्रकार मनुष्य का मन जब दूसरी ओर लगा होता है, उसी समय सहसा मृत्यु आ जाती है और उसे लेकर चल देती है।
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