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पुत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 12
(यस्यां रात्र्यां व्यतीतायां न किञ्चिच्छुभमाचरेत्।) तदैव वन्ध्यं दिवसमिति विद्याद् विचक्षणः । अनवाप्तेषु कामेषु मृत्युरभ्येति मानवम् ॥
जिस रात के बीतने पर मनुष्य कोई शुभ कर्म न करे, उस दिन को विद्वान् पुरुष 'व्यर्थ ही गया' समझे। मनुष्य की कामनाएँ पूरी भी नहीं होने पातीं कि मौत उसके पास आ पहुँचती है।
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