मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रत्यभिज्ञाहृदयम • अध्याय 1 • श्लोक 21
समाधिसंस्कारवति व्युत्थाने भूयो भूयश्चिदेक्या- मर्शान्नित्योदितसमाधिलाभः ।।
समाधि के संस्कार से परिपूर्ण व्युत्थान में बार-बार चित् (पारमार्थिक चेतना) के साथ अपने ऐक्य का चिन्तन करते रहने से शाश्वत (सदा प्रकट) समाधि का लाभ होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रत्यभिज्ञाहृदयम के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रत्यभिज्ञाहृदयम के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें