शंकर सम्बन्धी जो उपनिषद् या रहस्य है उसका सार प्रत्यभिज्ञा है। उस प्रत्यभिज्ञा रूपी महासमुद्र से संसार रूपी विष को शान्त करने के लिए सार (श्रेष्ठभाग) क्षेमराज ने निकाल कर (इस ग्रंथ में) रख दिया है।
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