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प्रत्यभिज्ञाहृदयम • अध्याय 1 • श्लोक 14
तदपरिज्ञाने स्वशक्तिभिर्व्यामोहितता संसारित्वम् ।।
संसारदशा उसके (पंचकृत्य के) अज्ञान के कारण अपनी ही शक्तियों से मोहित हो जाना है।
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