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प्रत्यभिज्ञाहृदयम • अध्याय 1 • श्लोक 13
श्राभासन-रक्ति-विमर्शन-बीजावस्थापन विलापनतस्तानि ।।
प्रकाशन-आस्वादन, आत्माबोध, बीज का अवस्थापन, विलापन (भेद) से इनको अर्थात् इन पाँच कृत्यों को करता है।
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