मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रश्नोत्तर रत्नमालिका • अध्याय 1 • श्लोक 59
किं मिथ्या? - यद्विद्यानाश्यं । तुच्छं तु? - शशविषाणादि । का च अनिर्वचनीया? किं कल्पितम् ? – द्वैतम् । माया ।
मिथ्या (भ्रम) क्या है? सही ज्ञान के प्रकाश से जो नाश होता है। अवर्णनीय क्या है? माया। तुच्छ क्या है? खरगोश के सींग जैसी चीजें, जिनका अस्तित्व ही नहीं है। कल्पनीय क्या है? द्वैतवाद (जीव और शिव का अलगाव)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रश्नोत्तर रत्नमालिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रश्नोत्तर रत्नमालिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें