मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
प्रश्नोत्तर रत्नमालिका • अध्याय 1 • श्लोक 47
कुत्र अनृतेऽपि अपापम्? यच्चोक्तं धर्मरक्षार्थम् । को धर्मः? अभिमतो यः शिष्टानां निजकुलीनानाम् ।
कब असत्य भी पातक नहीं रहता? जब धर्म रक्षणार्थ कहा गया हो। धर्म क्या है ? कुल के महान एवं पवित्र पूर्वजों द्वारा स्वीकृत शिष्टाचार और नैतिक मूल्य।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
प्रश्नोत्तर रत्नमालिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

प्रश्नोत्तर रत्नमालिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें