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प्रश्नोत्तर रत्नमालिका • अध्याय 1 • श्लोक 31
केन अशोच्यः पुरुषः? प्रणतकलत्रेण धीरविभवेन । इह भुवने को शोच्यः? सत्यपिविभवे न यो दाता ।
क्या व्यक्ति को शोकमुक्त करता है ? आज्ञाकारी पत्नी और स्थायी समृद्धि। विश्व में क्या शोक करने जैसा है? समृद्ध होते हुए भी जो दान नहीं करता है।
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