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प्रश्नोत्तर रत्नमालिका • अध्याय 1 • श्लोक 28
विद्वन्मनोहरा का? सत्कविता बोधवनिता च । कं न स्पृशति विपत्तिः?, प्रवृद्धवचनानुवर्तिनं दान्तं ।
क्या विद्वानों को मोहित करता है? उन्नत करती हुई कविता और ज्ञान रुपी स्त्री। विपत्ति किसे स्पर्श नहीं कर सकती? जो बड़ों की आज्ञा को अनुसरता है और संयमी है।
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