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प्रश्नोत्तर रत्नमालिका • अध्याय 1 • श्लोक 25
दानं प्रियवाक् सहितं, ज्ञानं अगर्व, क्षमान्वितं शौर्यम् । वित्तं त्यागसमेतं दुर्लभमेतत् चतुर्भद्रम् ।
मीठी वाणी के साथ किया हुआ दान, गर्व रहित ज्ञान, क्षमा सहित शौर्य और संपत्ति की ओर त्याग (उदारता) की दृष्टि – यह चार बातें दुर्लभ है।
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