जीवमात्र को कौन वश कर सकता है?
जिसकी वाणी सत्य और प्रिय है तथा जो विनम्र है।
व्यक्ति को कहाँ स्थिर होना चाहिए?
इस विश्व में और उसके परे जो लाभदायी है, ऐसे सच्चे पथ पर।
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