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प्रश्नोत्तर रत्नमालिका • अध्याय 1 • श्लोक 20
कस्य वशे प्राणिगणः? सत्यप्रियभाषिणो विनीतस्य । क्व स्थातव्यम् ? न्याय्ये पथि दृष्ट अदृष्ट लाभाढ्ये ।
जीवमात्र को कौन वश कर सकता है? जिसकी वाणी सत्य और प्रिय है तथा जो विनम्र है। व्यक्ति को कहाँ स्थिर होना चाहिए? इस विश्व में और उसके परे जो लाभदायी है, ऐसे सच्चे पथ पर।
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