ते तमर्चयन्तस्त्वं हि नः पिता योऽस्माकमविध्यायाः परं पारं तारयसीति।
नमः परमऋषिभ्यो नमः परमऋषिभ्यः ॥
वे उस (ऋषि/परम पुरुष) की स्तुति करते हुए बोले—
“आप ही हमारे पिता हैं, क्योंकि आप हमें इस अविद्या(अज्ञान)के परे ले जाकर परम पार तक पहुँचा देते हैं।”
और उन्होंने प्रणाम किया—
“नमः परम ऋषियों को, नमः परम ऋषियों को।”
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